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डिलीवरी के बाद महिला का शरीर काफी नाजà¥à¤• होता है, à¤à¤¸à¥‡ में सही खानपान पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना जरूरी होता है, ताकि अचà¥à¤›à¥€ तरह से पोषण मिले और किसी तरह का नà¥à¤•सान न हो। डिलीवरी के बाद महिला नवजात शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ à¤à¥€ कराती है, जिस कारण से अधिक पोषण की जरूरत होती है। इसलिà¤, आपको डिलीवरी के बाद की डाइट सोच समà¤à¤•र चà¥à¤¨à¤¨à¥€ चाहिà¤à¥¤ मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में हम डिलीवरी के बाद की डाइट के बारे में आपको विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताà¤à¤‚गे। हम बताà¤à¤‚गे कि डिलीवरी के बाद आपको कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिठऔर किन चीजों से परहेज करना चाहिà¤à¥¤
आइà¤, सबसे पहले जानते हैं कि डिलीवरी के बाद अपनी डाइट में कà¥à¤¯à¤¾ शामिल करना चाहिà¤à¥¤
डिलीवरी के बाद कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤? |
यह समà¤à¤¨à¤¾ जरूरी है कि पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद किस तरह के पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µ आपको अपने खानपान में शामिल करने चाहिà¤, जो आपको पोषण दे सकें। नीचे हम नई मां की डाइट में शामिल होने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की लिसà¥à¤Ÿ दे रहे हैं। ये सà¤à¥€ विटामिन, खनिज, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, आयरन, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और ओमेगा-3 à¤à¤¸ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र हैं, जो नई मां के लिठजरूरी हैं। इनकी मदद से महिला को डिलीवरी के बाद सामानà¥à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ में आने में मदद मिलती है (1)। आप इस डाइट को सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद à¤à¥€ ले सकती हैं (2)। फिर à¤à¥€ सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ के बाद और सही खानपान के लिठà¤à¤• बार अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह जरूर लें।
कम फैट वाले डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ : पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद महिला को डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का सेवन करना चाहिà¤à¥¤ यह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के लिठजरूरी है। इनमें कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और विटामिन-ई होता है, जो महिला के लिठजरूरी है। आपको बता दें कि नवजात शिशॠमां के दूध से ही कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® गà¥à¤°à¤¹à¤£ करता है, जिससे उसकी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ मजबूत होती हैं। à¤à¤¸à¥‡ में मां के लिठकैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® बहà¥à¤¤ जरूरी हो जाता है। इसलिà¤, आप रोजाना तीन कप डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ को अपने खानपान में शामिल करें।
लीन मीट : अगर महिला मांसाहारी है, तो डिलीवरी के बाद उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लीन मीट à¤à¥€ अपने खानपान में शामिल करना चाहिà¤à¥¤ इसमें आयरन, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और विटामिन बी-12 पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में होता है, जो महिला को ऊरà¥à¤œà¤¾ देता है। यह उस समय आपको ऊरà¥à¤œà¤¾ देता है, जब सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बाद आपकी ऊरà¥à¤œà¤¾ कम होने लगती है।
दालें : à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ डाइट के लिठजरूरी है कि आपके खानपान में दालें जरूर शामिल हों। ये पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, फाइबर, विटामिन और खनिज का बेहतर सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं। आप हरी और लाल दाल उबाल कर खा सकती हैं या इनका हलवा बनाकर खाना à¤à¥€ बेहतर विकलà¥à¤ª है। दालें आपको ताकत देंगी। साथ ही अतिरिकà¥à¤¤ फैट से à¤à¥€ बचाà¤à¤‚गी और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¥€ देंगी।
फलियां : गहरे रंग की फलियां जैसे राजमा और बà¥à¤²à¥ˆà¤• बीनà¥à¤¸ में पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ होता है। ये सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताओं को ऊरà¥à¤œà¤¾ देती हैं और शाकाहारी महिलाओं के लिठकाफी फायदेमंद हैं।
हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ : इनमें विटामिन-à¤, विटामिन-सी और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में होता है। इसके अलावा, इनमें कम कैलोरी पाई जाती हैं, जो पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के बाद के बढ़े हà¥à¤ वजन को कम करने में मदद करती हैं। आप बà¥à¤°à¥‹à¤•ली, पालक, बीनà¥à¤¸, परवल और टिंडा जैसी हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अपने खानपान में जरूर शामिल करें।
à¤à¥‚रे चावल : इसमें कोई दो राय नहीं है कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के बाद महिला का वजन काफी बढ़ जाता है, जिसे कम करना बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। इसलिà¤, अपने खानपान में कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ की मातà¥à¤°à¤¾ को कम करें। आप अपने खाने में सफेद चावल की जगह à¤à¥‚रे चावल को शामिल करें। इससे आपको ऊरà¥à¤œà¤¾ à¤à¥€ मिलेगी और नà¥à¤•सान à¤à¥€ नहीं होगा। साथ ही अगर सफेद चावल माढ़ हटाकर यानी बिना सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤š वाले लिठजाà¤à¤‚, तो नà¥à¤•सान नहीं करेंगे।
बà¥à¤²à¥‚बेरी : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बाद अपनी डाइट में बà¥à¤²à¥‚बेरी शामिल करना à¤à¤• बेहतर विकलà¥à¤ª है। इसमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में विटामिन और खनिज होते हैं, जो फायदा पहà¥à¤‚चाते हैं। इसके अलावा, यह आपको सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ देते हैं, जिससे ऊरà¥à¤œà¤¾ मिलती है।
संतरे : डिलीवरी के बाद आप संतरे का सेवन जरूर करें। इसमें विटामिन-सी होता है, जो सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली महिलाओं के लिठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरूरी होता है। आप चाहें तो इसे फल के तौर पर खा सकती हैं या संतरे का जूस à¤à¥€ पी सकती हैं।
सालà¥à¤®à¤¨ : इसे नई मां के लिठपोषण का खजाना कहा जाता है। अनà¥à¤¯ फैटी मछली की तरह सालà¥à¤®à¤¨ में डीà¤à¤šà¤ होता है, जो बचà¥à¤šà¥‡ के तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा विकास के लिठजरूरी होता है। हालांकि, मां के दूध में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक डीà¤à¤šà¤ होता है, लेकिन अगर महिला डीà¤à¤šà¤ यà¥à¤•à¥à¤¤ चीजें खाà¤, तो यह बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फायदा पहà¥à¤‚चाता है। डीà¤à¤šà¤, डिलीवरी के बाद अवसाद को कम करने में à¤à¥€ मदद करता है। यूà¤à¤¸ à¤à¤«à¤¡à¥€à¤ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, नई मां को सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में दो सरà¥à¤µà¤¿à¤‚ग सालà¥à¤®à¤¨ का सेवन करना चाहिà¤, ताकि उसमें मौजूद मरà¥à¤•री आपको बचà¥à¤šà¥‡ को नà¥à¤•सान न पहà¥à¤‚चाठ(3)।
गेहूं की बà¥à¤°à¥‡à¤¡ : आप गेहूं की बà¥à¤°à¥‡à¤¡ को à¤à¥€ अपने खानपान में शामिल कर सकती हैं। इसमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में आयरन और फाइबर होते हैं, जो नई मां के लिठजरूरी है।
ओटमील : सà¥à¤¬à¤¹ के नाशà¥à¤¤à¥‡ में आप ओटमील का सेवन कर सकती हैं। इनमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पोषक ततà¥à¤µ होते हैं, जो आपको दिनà¤à¤° ऊरà¥à¤œà¤¾ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र रखते हैं। ओटà¥à¤¸ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ होते हैं। इसके अलावा, इनमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में फाइबर पाया जाता है, जो कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ से राहत दिलाता है। आप चाहें तो दूध में ओटमील, फल और सूखे मेवे डालकर खा सकती हैं। आप खिचड़ी या ओटà¥à¤¸ का उपमा à¤à¥€ बनाकर खा सकती हैं।
अंडे : अंडों में à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ पाया जाता है, जो नई मां को फायदा पहà¥à¤‚चाता है। इसके लिठआप उबला अंडा, अंडे की à¤à¥à¤°à¥à¤œà¥€ या फिर ऑमलेट के रूप में अपने खानपान में अंडे को शामिल कर सकती हैं। आप अपने दूध में आवशà¥à¤¯à¤• फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के सà¥à¤¤à¤° को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ के लिठडीà¤à¤šà¤-फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¾à¤‡à¤¡ अंडे चà¥à¤¨ सकती हैं।
पानी : जब नई मां सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराती है, तो उसे डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का खतरा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहता है। आपको डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ न हो, उसके लिठजरूरी है कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पानी पिà¤à¤‚। इसके अलावा, खà¥à¤¦ में à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ बनाठरखने के लिठदूध और जूस का à¤à¥€ नियमित रूप से सेवन करें।
हलà¥à¤¦à¥€ : हलà¥à¤¦à¥€ में विटामिन-बी6, विटामिन-सी, पोटैशियम व मैंगनीज होते हैं। इसमें सूजन कम करने के गà¥à¤£ होते हैं और यह घाव को à¤à¥€ जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¤à¥€ है। इसलिà¤, डिलीवरी के बाद घाव को à¤à¤°à¤¨à¥‡ में और पेट संबंधी परेशानियों को ठीक करने में हलà¥à¤¦à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥€ है (4)। आप रोजाना रात को सोते समय à¤à¤• गिलास गरà¥à¤® दूध में आधा चमà¥à¤®à¤š हलà¥à¤¦à¥€ डालकर पी सकती हैं।
अदरक का चूरà¥à¤£ : इसमें विटामिन-बी6, विटामिन-ई, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® व पोटैशियम होता है, जो डिलीवरी के बाद आपको फायदा पहà¥à¤‚चाता है। इसमें à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£ होते हैं, जो शरीर से सूजन कम करने में मदद करते हैं। आप à¤à¤• चà¥à¤Ÿà¤•ी अदरक का चूरà¥à¤£ अपनी सबà¥à¤œà¥€ या चटनी में डालकर खा सकती हैं।
अजवायन : पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद अजवायन का सेवन à¤à¥€ काफी फायदेमंद होता है। यह आपको गैस और अपच की समसà¥à¤¯à¤¾ से राहत दिलाती है। इसमें à¤à¤‚टीबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤², à¤à¤‚टीफंगल, à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट और à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• गà¥à¤£ à¤à¥€ होते हैं। आप रोजाना à¤à¤• चà¥à¤Ÿà¤•ी अजवायन गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी के साथ खा सकती हैं।
रागी : रागी में à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में आयरन और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® होता है, जो डिलीवरी के बाद महिला के लिठजरूरी है। यह बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने के बाद खोई ऊरà¥à¤œà¤¾ को फिर से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने में मदद करती है। अगर आपको डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो रागी à¤à¤• बेहतरीन विकलà¥à¤ª है। इसके लिठआप रागी के आटे का डोसा, रोटी या हलवा बनाकर खा सकती हैं।
बादाम : पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद डाइट में बादाम को जरूर शामिल करना चाहिà¤à¥¤ इसमें सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ, फाइबर, विटामिन-बी2, विटामिन-ई, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, कॉपर, जिंक, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और पोटैशियम होते हैं, जो डिलीवरी के बाद सामानà¥à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ में आने में मदद करते हैं। आप बादाम को दूध में डालकर पी सकती हैं।
मेथी के दाने : मेथी के दानों में पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, आयरन, विटामिन और खनिज पाठजाते हैं। मेथी आपको जोड़ों के दरà¥à¤¦ और पीठदरà¥à¤¦ से राहत दिलाने में मदद करती है। आप अपने खाने में मेथी के दाने डालकर पका सकती हैं।
काले और सफेद तिल : तिल में पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, कॉपर और फॉसà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ होता है, जो डिलीवरी के बाद महिला को फायदा पहà¥à¤‚चाता है। इससे आपका पेट ठीक रहता है और जरूरी खनिज शरीर को मिलते हैं। आप इसे चटनी, सबà¥à¤œà¥€ या किसी मीठे में डालकर खा सकती हैं।
ये थे कà¥à¤› जरूरी खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डिलीवरी के बाद आपको अपने खानपान में शामिल करना चाहिà¤à¥¤ इसके अलावा, अगर आप किसी अनà¥à¤¯ चीज को अपनी डाइट में शामिल करना चाहती हैं, तो इस बारे में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लें।
आइà¤, अब जानते हैं कि डिलीवरी के बाद कà¥à¤¯à¤¾ नहीं खाना चाहिà¤à¥¤
डिलीवरी के बाद कà¥à¤¯à¤¾ नहीं खाना चाहिà¤? |
जिस तरह पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में कई चीजों से परहेज करने की जरूरत होती है, उसी तरह डिलीवरी के बाद à¤à¥€ कà¥à¤› चीजों से दूरी बनाठरखनी चाहिà¤à¥¤ नीचे हम बता रहे हैं कि डिलीवरी के बाद कà¥à¤¯à¤¾ नहीं खाना चाहिठ:
मसालेदार à¤à¥‹à¤œà¤¨ : डिलीवरी के बाद à¤à¥€ आपको मसालेदार à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाने से बचना चाहिà¤à¥¤ मसालेदार à¤à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के जरिठआपके नवजात शिशॠको नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकते हैं, जिससे उसकी आंतें और रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकता है (5)।
तैलीय खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ : डिलीवरी के बाद तैलीय खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ आपके शरीर का फैट और बढ़ा सकते हैं, जिससे आपको सही शेप में आने में और दिकà¥à¤•त हो सकती है। इसके अलावा, आप जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मीठा, मकà¥à¤–न या अनà¥à¤¯ वसा यà¥à¤•à¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ न खाà¤à¤‚। इसकी बजाठआप सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ फैट का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं, जैसे अखरोट, सोयाबीन, अलसी, वेजिटेबल ऑयल, ओलिव ऑयल (जैतून का तेल) जैसे तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं।
गैस बनाने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ : जिन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से गैस, à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ व डकार जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हों, उनसे दूर रहें। इनसे शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर à¤à¥€ बà¥à¤°à¤¾ असर पड़ सकता है। यहां तक कि आप सॉफà¥à¤Ÿ चीज़, आइसकà¥à¤°à¥€à¤® और कोलà¥à¤¡ डà¥à¤°à¤¿à¤‚क आदि से à¤à¥€ दूर रहें।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली चीजों से दूर रहें : à¤à¤¸à¥€ कई चीजें होती हैं, जिससे बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ मिलà¥à¤• के जरिठशिशॠको à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है। अगर आपको à¤à¤¸à¤¾ महसूस हो कि बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ मिलà¥à¤• पीने के बाद शिशॠको किसी तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो रही है, तो धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤¸à¤¾ किस चीज की वजह से हो रहा है। इसका पता लगाने के लिठआप अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से à¤à¥€ मदद ले सकती हैं।
कैफीन, à¤à¤²à¥à¤•ोहल व निकोटिन न लें : अपनी डाइट से कैफीन व à¤à¤²à¥à¤•ोहल पूरी तरह से हटा दें (6)। अगर आपको लगता है कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी खतà¥à¤® हो गई है और अब इनका सेवन किया जा सकता है, तो आप गलत सोच रही हैं। जब तक आपका शिशॠआपका दूध पिà¤à¤—ा, आपके खानपान का सीधा असर आपके शिशॠपर पड़ता है।
खà¥à¤¦ से दवाà¤à¤‚ न लें : आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बिना खà¥à¤¦ से कोई à¤à¥€ दवा न लें। ये दवाà¤à¤‚ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ मिलà¥à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर असर डाल सकती हैं। यहां तक कि अगर आप मलà¥à¤Ÿà¥€ विटामिन दवा à¤à¥€ लेना चाहती हैं, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछकर लें।
नोट : डिलीवरी के बाद कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ और कà¥à¤¯à¤¾ न खाà¤à¤‚ की इस लिसà¥à¤Ÿ का पालन डिलीवरी के कम से कम तीन महीने बाद तक करते रहें।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ à¤à¥‹à¤œà¤¨ की आदतें
जब आप लंबे समय तक सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ खानपान की आदत डाल लेंगी, तो इससे न सिरà¥à¤« आपका वजन संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रहेगा, बलà¥à¤•ि शरीर à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहेगा। नीचे हम खाने की कà¥à¤› आदतों के बारे में बता रहे हैं, जिससे आपको जलà¥à¤¦à¥€ असर होगा :
जब à¤à¥‚ख लगे तà¤à¥€ खाà¤à¤‚।
थोड़ा-थोड़ा और धीरे-धीरे खाà¤à¤‚।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वसा का सेवन करें।
हर à¤à¥‹à¤œà¤¨ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ शामिल करें।
परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ खाà¤à¤‚।
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